हरि भजन से ही कलियुग में भगवान मिल जाते हैं

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नगर में कथा के शुभारंभ पर कलश यात्रा निकाली।

जो अच्छा लगता है वह सुख और जो बुरा लगता है वह दुख। सच्चा सुख भगवान प्राप्ति से ही होता है। सतयुग में तप से और कलयुग में हरी भजन से ही भगवान मिल जाते है। भक्ति के 9 मार्ग हैं। अगर आप उन पर नहीं चल सकते हैं तो किसी सत्संगी का साथ ले तो भी आपको पुण्य लाभ मिलेगा। 8 वर्ष की आयु तक नहीं बोलने वाले नरसिंह मेहता हरि भजन में ऐसे रम गए की उन्होंने अपने हिस्से की 56 करोड़ की जायदाद दीन दुखियों में बांट दी थी। भगवान ने 55 बार प्रत्यक्ष आकर नरसिंह मेहता की मदद की।

यह बात उमिया पाटीदार धर्मशाला में रविवार से आयोजित नानीबाई रो मायरो कथा के प्रथम दिन कथावाचक पं. सुनीलजी व्यास ने कही। नरसिंहजी के जन्म से उन्हें भक्ति प्राप्त होने तक का वर्णन सुनाया। इसके पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में बालिकाएं अपने सिर पर कलश धारण कर चल रही थी। धर्म प्रेमी जनता हाथ में ध्वजा पताका लहरा रहे थे।

यजमान अपने हाथों में ठाकुरजी और नानीबाई के मायरे की पौथी लेकर चल रहे थे। कथास्थल पहुंचने पर व्यासपीठ पर ठाकुरजी को विराजित कर उनकी पूजा अर्चना की। उसके बाद कथाा शुरू की। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिला, पुरुष शामिल हुए। विश्राम पर आरती कर प्रसाद बांटा। रात में सुंदरकांड का पाठ नवयुवक मंडल के कलाकारों ने किया।

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